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कलेक्ट्रेट

कलेक्ट्रेट जनपद का प्रमुख प्रशासनिक कार्यालय है, जो जिला मजिस्ट्रेट (DM) के नेतृत्व में कार्य करता है। जिला मजिस्ट्रेट सहारनपुर जनपद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी होते हैं। वे मंडलायुक्त, सहारनपुर मंडल तथा उत्तर प्रदेश शासन के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करते हैं। वे एक साथ जिला मजिस्ट्रेट, जिला कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में दायित्वों का निर्वहन करते हैं।

जिला मजिस्ट्रेट जनपद प्रशासन के शीर्ष पर स्थित होते हैं और जनपद में कार्यरत सभी विभागों के मध्य प्रमुख समन्वयक प्राधिकारी के रूप में कार्य करते हैं। वे राज्य सरकार और आम जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी हैं। जनपद के लगभग प्रत्येक महत्वपूर्ण सार्वजनिक विषय पर उनका प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण रहता है।


जिला मजिस्ट्रेट – कर्तव्य एवं दायित्व

1. जिला मजिस्ट्रेट (कानून एवं व्यवस्था प्राधिकारी) के रूप में

जिला मजिस्ट्रेट जनपद में शांति एवं कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उत्तरदायी होते हैं। वे दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) एवं अन्य निवारक विधियों के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हैं। वे समस्त कार्यपालक मजिस्ट्रेटों की निगरानी करते हैं तथा पुलिस अधीक्षक के साथ समन्वय स्थापित कर प्रभावी कानून प्रवर्तन सुनिश्चित करते हैं। वे कारागार प्रशासन की देखरेख करते हैं, सार्वजनिक सभाओं का नियमन करते हैं तथा त्योहारों, सार्वजनिक आयोजनों एवं चुनावों का शांतिपूर्ण संचालन सुनिश्चित करते हैं। वे शस्त्र एवं विस्फोटक लाइसेंस जारी करते हैं तथा शांति भंग की संभावना होने पर निवारक कार्यवाही करते हैं।

2. जिला कलेक्टर (राजस्व प्रशासन प्रमुख) के रूप में

कलेक्टर के रूप में जिला मजिस्ट्रेट जनपद के सर्वोच्च राजस्व अधिकारी होते हैं। वे भू-राजस्व की वसूली, सरकारी देयों की प्राप्ति तथा भू-अभिलेखों के संधारण की निगरानी करते हैं। वे तहसीलदार, नायब तहसीलदार, कानूनगो एवं लेखपालों पर प्रशासनिक नियंत्रण रखते हैं। वे राजस्व न्यायालयों, नामांतरण प्रकरणों, भूमि अर्जन कार्यवाहियों, मुआवजा वितरण तथा आपदा राहत कार्यों की देखरेख करते हैं। राजस्व संबंधी विषयों में वे राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश के समग्र पर्यवेक्षण में कार्य करते हैं।

3. जिला निर्वाचन अधिकारी के रूप में

जिला मजिस्ट्रेट जनपद में लोकसभा, विधानसभा, पंचायत एवं नगर निकाय चुनावों का संचालन करते हैं। वे निर्वाचक नामावली की तैयारी एवं संशोधन सुनिश्चित करते हैं, मतदान व्यवस्थाओं की निगरानी करते हैं, आदर्श आचार संहिता का अनुपालन कराते हैं तथा मतगणना की शांतिपूर्ण प्रक्रिया सुनिश्चित करते हैं।

4. जनपद प्रशासन के प्रमुख के रूप में

जिला मजिस्ट्रेट समस्त विभागों में सरकारी योजनाओं एवं विकास कार्यक्रमों के क्रियान्वयन का समन्वय करते हैं। वे आपदा प्रबंधन एवं आपातकालीन प्रतिक्रिया की निगरानी करते हैं। वे जन शिकायतों की समीक्षा करते हैं, वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित करते हैं तथा प्रशासन में पारदर्शिता बनाए रखते हैं। वे जिला स्तरीय समीक्षा बैठकों की अध्यक्षता करते हैं तथा कल्याणकारी योजनाओं की प्रगति की निगरानी करते हैं। जनपद प्रशासन की समग्र दक्षता एवं उत्तरदायित्व उनके नेतृत्व पर आधारित होता है।


अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM)

1. अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन)

अपर जिला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) जिला मजिस्ट्रेट की सहायता करते हुए सामान्य प्रशासन एवं कार्यपालक विषयों का पर्यवेक्षण करते हैं। वे कार्यपालक मजिस्ट्रेटी कार्यों, जन शिकायतों की निगरानी तथा नियामक प्रवर्तन मामलों की देखरेख करते हैं। वे मजिस्ट्रियल जांच कराते हैं, लाइसेंसिंग शाखाओं की निगरानी करते हैं। वे तहसील प्रशासन एवं राजस्व न्यायालयों के साथ समन्वय स्थापित करते हैं। वे जिला मजिस्ट्रेट द्वारा प्रत्यायोजित शक्तियों का प्रयोग करते हैं।

2. अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व)

अपर जिला मजिस्ट्रेट (वित्त एवं राजस्व) राजस्व प्रशासन का पर्यवेक्षण करते हैं, जिसमें नामांतरण अपीलें, भूमि अर्जन प्रकरण, वसूली कार्यवाहियां एवं स्टाम्प प्रकरण सम्मिलित हैं। वे भू-राजस्व प्राप्ति एवं वित्तीय प्रदर्शन की समीक्षा करते हैं। वे वित्तीय नियमों, बजट अनुशासन एवं लेखा परीक्षण अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। आपदा प्रबंधन गतिविधियों का समन्वय करते हैं।

3. अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक)

अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक) अर्द्ध-न्यायिक कार्यों का निर्वहन करते हैं तथा विभिन्न अधिनियमों के अंतर्गत अपील एवं पुनरीक्षण प्रकरणों की सुनवाई करते हैं। वे दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निवारक कार्यवाहियों की निगरानी करते हैं तथा न्यायिक मामलों की लंबितता की समीक्षा करते हैं। वे अभिलेख संधारण एवं प्रकरणों के समयबद्ध निस्तारण को सुनिश्चित करते हैं।


नगर मजिस्ट्रेट

नगर मजिस्ट्रेट शहरी क्षेत्र में जिला मजिस्ट्रेट की सहायता करते हुए कार्यपालक एवं नियामक दायित्वों का निर्वहन करते हैं। वे दंड प्रक्रिया संहिता के अंतर्गत निवारक कार्यवाहियां, लाइसेंस संबंधी प्रकरण, अतिक्रमण नियंत्रण एवं शहरी कानून-व्यवस्था प्रबंधन का कार्य करते हैं। वे नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय शाखा की निगरानी करते हैं तथा पुलिस प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित करते हैं।


कलेक्ट्रेट अनुभाग

कलेक्ट्रेट विभिन्न प्रशासनिक, राजस्व, न्यायिक एवं नियामक अनुभागों के माध्यम से कार्य करता है। प्रत्येक अनुभाग विशिष्ट प्रकार के प्रकरणों एवं नागरिक सेवाओं का संचालन करता है:

1. सामान्य अनुभाग

नियुक्ति, पदोन्नति, सेवा अभिलेख, अवकाश प्रकरण एवं आंतरिक कार्यालय समन्वय से संबंधित कार्यों का संचालन।

2. राजस्व अनुभाग-1

राजस्व अपीलें, नामांतरण, बंटवारा एवं अर्द्ध-न्यायिक राजस्व प्रकरण।

3. राजस्व अनुभाग-2

सरकारी देयों की वसूली, बकाया वसूली एवं प्रमाण-पत्र प्रकरण।

4. राजस्व अनुभाग-3

भूमि अर्जन, मुआवजा वितरण एवं पुनर्वास प्रकरण।

5. न्यायिक अनुभाग

अपर जिला मजिस्ट्रेट (न्यायिक) के समक्ष अपील एवं पुनरीक्षण प्रकरणों का संधारण।

6. नगर विकास अनुभाग

नगर निकाय, शहरी प्रशासन एवं अतिक्रमण संबंधी प्रकरण।

7. शस्त्र अनुभाग

शस्त्र लाइसेंस जारी करना, नवीनीकरण एवं विनियमन।

8. संग्रह अनुभाग

भू-राजस्व प्राप्ति एवं सरकारी देयों की निगरानी।

9. नाजिर अनुभाग

जब्त संपत्ति, जमा राशि एवं सरकारी सामग्री का अभिलेख एवं निस्तारण।

10. अंग्रेजी अभिलेख अनुभाग

अंग्रेजी भाषा के प्रशासनिक अभिलेखों का संधारण।

11. राजस्व अभिलेख अनुभाग

भू-अभिलेख एवं राजस्व रजिस्टरों का संधारण।

12. जिला भूमि सुधार अनुभाग

भूमि सुधार अधिनियमों के अंतर्गत प्रकरणों का संचालन।

13. न्यायिक अभिलेख अनुभाग

निस्तारित न्यायिक प्रकरणों के अभिलेखों का संरक्षण।

14. जनसूचना अनुभाग

सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन का निस्तारण।

15. शिकायत अनुभाग

आईजीआरएस एवं अन्य जन शिकायतों का पंजीकरण एवं अनुश्रवण।

16. स्टाम्प अनुभाग

स्टाम्प शुल्क कमी, अभिलेख अधिरोपण एवं वसूली प्रकरण।

17. ग्रामीण सीलिंग अनुभाग

भूमि सीमा अधिनियम के अंतर्गत अधिशेष भूमि निर्धारण संबंधी प्रकरण।

सभी अनुभाग जिला मजिस्ट्रेट एवं संबंधित अपर जिला मजिस्ट्रेटों के समग्र पर्यवेक्षण में कार्य करते हैं।