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विकास भवन (सी०डी०ओ० एवं विकास विभाग)


मुख्य विकास अधिकारी (CDO), सहारनपुर

मुख्य विकास अधिकारी (CDO) सहारनपुर जनपद में समस्त विकास विभागों के योजना निर्माण, समन्वय, पर्यवेक्षण एवं अनुश्रवण के लिए उत्तरदायी प्रमुख जिला स्तरीय अधिकारी हैं। CDO ग्रामीण विकास, कृषि, नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा, सामाजिक कल्याण, रोजगार सृजन तथा आधारभूत संरचना विकास से संबंधित केंद्र एवं राज्य सरकार की प्रमुख योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित करते हैं। भौतिक एवं वित्तीय प्रगति की समीक्षा हेतु जिला स्तरीय अधिकारियों एवं खंड विकास अधिकारियों के साथ नियमित समीक्षा बैठकें आयोजित की जाती हैं। CDO योजनाओं के अंतर्गत प्राप्त धनराशि के समुचित उपयोग की निगरानी करते हुए पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करते हैं तथा समयबद्ध उपयोगिता प्रमाण-पत्र प्रेषित कराते हैं। योजनाओं के जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की पुष्टि हेतु स्थलीय निरीक्षण भी किए जाते हैं। साथ ही, CDO जिला मजिस्ट्रेट के साथ समन्वय स्थापित कर समेकित जिला विकास योजना एवं योजनाओं के अभिसरण को सुनिश्चित करते हैं।


मुख्य विकास अधिकारी के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्यरत अधिकारी


1. जिला विकास अधिकारी (DDO)

समस्त विकास खंडों में ग्रामीण विकास योजनाओं का पर्यवेक्षण करते हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), मनरेगा एवं आजीविका मिशन की निगरानी करते हैं। IGRS सहित जन शिकायतों की समीक्षा करते हैं। राज्य सरकार द्वारा निर्गत विकास संबंधी निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। खंड विकास अधिकारियों एवं पंचायत अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हैं। समेकित प्रगति प्रतिवेदन मुख्य विकास अधिकारी को प्रस्तुत करते हैं।

2. परियोजना निदेशक, डीआरडीए

जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के अंतर्गत गरीबी उन्मूलन एवं स्वरोजगार योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। स्वयं सहायता समूहों एवं आजीविका गतिविधियों का पर्यवेक्षण करते हैं। ग्रामीण आवास योजनाओं में लाभार्थी चयन एवं धनराशि हस्तांतरण की निगरानी करते हैं। स्थलीय निरीक्षण एवं सामाजिक अंकेक्षण कराते हैं। वित्तीय उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं। जिला प्रशासन को नियमित प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं।

3. जिला अर्थ एवं सांख्याधिकारी (DESTO)

जनपद स्तरीय सांख्यिकीय आंकड़ों का संकलन एवं संधारण करते हैं। आर्थिक एवं जनसांख्यिकीय प्रतिवेदन तैयार करते हैं। विकास योजनाओं के लिए साक्ष्य आधारित नीति निर्माण में सहयोग करते हैं। योजनाओं के प्रदर्शन संकेतकों की निगरानी करते हैं। सर्वेक्षण एवं जनगणना संबंधी कार्यों का समन्वय करते हैं। समीक्षा बैठकों में विश्लेषणात्मक जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

4. जिला कार्यक्रम अधिकारी – आईसीडीएस (DPO)

आंगनवाड़ी केंद्रों एवं पोषण सेवाओं का पर्यवेक्षण करते हैं। बाल विकास एवं मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं। पोषण अभियान के सूचकों की निगरानी करते हैं। आईसीडीएस परियोजनाओं का निरीक्षण करते हैं। मानदेय एवं पोषाहार वितरण की समयबद्धता सुनिश्चित करते हैं। लाभार्थियों का अभिलेख संधारित करते हैं।

5. सहायक अभियंता, लघु सिंचाई

लघु सिंचाई परियोजनाओं की योजना एवं पर्यवेक्षण करते हैं। नलकूपों एवं सिंचाई संरचनाओं का अनुरक्षण करते हैं। कृषि हेतु जल उपलब्धता सुनिश्चित करते हैं। तकनीकी अनुमान एवं कार्ययोजना तैयार करते हैं। स्थलीय निरीक्षण करते हैं। अधोसंरचना की स्थिति की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

6. परियोजना अधिकारी, यूपीनेडा

सोलर स्ट्रीट लाइट एवं रूफटॉप सोलर योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। पीएम कुसुम योजना के अंतर्गत सोलर पंप स्थापना की निगरानी करते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देते हैं। अनुदान वितरण की प्रक्रिया सुनिश्चित करते हैं। लाभार्थियों का सत्यापन करते हैं। मुख्यालय को प्रगति विवरण भेजते हैं।

7. जिला युवा कल्याण अधिकारी

युवा विकास एवं खेल कार्यक्रमों का आयोजन करते हैं। राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में सहभागिता को प्रोत्साहित करते हैं। युवा सशक्तिकरण योजनाओं का संचालन करते हैं। खेल अधोसंरचना का अभिलेख रखते हैं। शैक्षणिक संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करते हैं। नेतृत्व एवं स्वयंसेवी कार्यक्रमों को बढ़ावा देते हैं।

8. सहायक निदेशक, मत्स्य

मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि योजनाओं को प्रोत्साहित करते हैं। मत्स्य पालकों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। तालाब विकास परियोजनाओं की निगरानी करते हैं। अनुदान वितरण सुनिश्चित करते हैं। जागरूकता शिविर आयोजित करते हैं। उत्पादन अभिलेख संधारित करते हैं।

9. जिला कृषि अधिकारी (DAO)

फसल विकास एवं अनुदान योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। उर्वरक एवं बीज वितरण की निगरानी करते हैं। किसान प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करते हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों को बढ़ावा देते हैं। फसल आंकड़ों की समीक्षा करते हैं। कृषि प्रसार अधिकारियों के साथ समन्वय करते हैं।

10. जिला कृषि रक्षा अधिकारी

कीट एवं रोग नियंत्रण उपायों का पर्यवेक्षण करते हैं। फसल निरीक्षण करते हैं। कीटनाशक वितरण का विनियमन करते हैं। किसानों को परामर्श सेवाएं प्रदान करते हैं। फसल सुरक्षा अभिलेख संधारित करते हैं। पौध स्वास्थ्य कार्यक्रम लागू करते हैं।

11. जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO)

पंचायती राज संस्थाओं का पर्यवेक्षण करते हैं। स्वच्छता एवं नागरिक कार्यों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। ग्राम पंचायतों का लेखा परीक्षण कराते हैं। निर्वाचित प्रतिनिधियों का प्रशिक्षण आयोजित करते हैं। ग्राम स्तर की अधोसंरचना परियोजनाओं की निगरानी करते हैं। खंड अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित करते हैं।

12. सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक, सहकारिता

सहकारी समितियों का विनियमन एवं पर्यवेक्षण करते हैं। कृषि ऋण वितरण की निगरानी करते हैं। सहकारी समितियों के निर्वाचन संपन्न कराते हैं। किसानों को ऋण वितरण की सुविधा प्रदान करते हैं। नई सहकारी समितियों का पंजीकरण करते हैं। सहकारिता अधिनियम का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं।

13. मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO)

पशुओं के टीकाकरण कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। कृत्रिम गर्भाधान सेवाओं का पर्यवेक्षण करते हैं। पशु स्वास्थ्य शिविर आयोजित करते हैं। डेयरी एवं पोल्ट्री विकास को बढ़ावा देते हैं। पशुधन बीमा योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। पशु चिकित्सा अधोसंरचना का अनुरक्षण करते हैं।

14. अधिशासी अभियंता, ग्रामीण अभियंत्रण विभाग

ग्रामीण अधोसंरचना परियोजनाओं का निष्पादन करते हैं। सड़क एवं भवन निर्माण कार्यों की निगरानी करते हैं। गुणवत्ता नियंत्रण सुनिश्चित करते हैं। परियोजना प्रतिवेदन एवं अनुमान तैयार करते हैं। ठेकेदारों के कार्यों का मूल्यांकन करते हैं। प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

15. जिला समाज कल्याण अधिकारी (DSWO)

वृद्धावस्था, विधवा एवं दिव्यांग पेंशन योजनाओं का संचालन करते हैं। अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण योजनाओं का प्रशासन करते हैं। लाभार्थियों का सत्यापन एवं अभिलेख संधारण करते हैं। डीबीटी हस्तांतरण सुनिश्चित करते हैं। शिकायतों की समीक्षा करते हैं। सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों की निगरानी करते हैं।

16. जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी

अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजनाओं का संचालन करते हैं। वित्तीय सहायता योजनाओं की निगरानी करते हैं। आवेदन पत्रों का सत्यापन करते हैं। जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं। समयबद्ध धनराशि वितरण सुनिश्चित करते हैं। अभिलेख एवं रिपोर्ट संधारित करते हैं।

17. जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास)

विकास उन्मुख कल्याण योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। अनुदान आधारित कार्यक्रमों की निगरानी करते हैं। पुनर्वास योजनाओं का समन्वय करते हैं। पात्रता का सत्यापन करते हैं। धनराशि उपयोग का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। समीक्षा प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हैं।

18. जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी

पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं का संचालन करते हैं। विवाह अनुदान सहायता योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। बेरोजगार युवाओं हेतु कंप्यूटर प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करते हैं। आवेदन पत्रों का सत्यापन करते हैं। पारदर्शी धनराशि वितरण सुनिश्चित करते हैं। लाभार्थियों का अभिलेख संधारित करते हैं।

19. जिला दिव्यांगजन कल्याण अधिकारी

दिव्यांगजन कल्याण योजनाओं का संचालन करते हैं। दिव्यांग प्रमाण-पत्र जारी करते हैं। सहायक उपकरण वितरण की सुविधा प्रदान करते हैं। जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं। लाभार्थी अभिलेख संधारित करते हैं। चिकित्सा अधिकारियों के साथ समन्वय करते हैं।

20. अपर मुख्य अधिकारी, जिला पंचायत

जिला पंचायत कार्यों का पर्यवेक्षण करते हैं। ग्रामीण अधोसंरचना योजना का समन्वय करते हैं। बजट उपयोग की निगरानी करते हैं। प्रशासनिक समीक्षा बैठकें आयोजित करते हैं। पंचायत नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। विकास योजना में सहयोग करते हैं।

21. बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA)

प्राथमिक विद्यालयों का पर्यवेक्षण करते हैं। शिक्षक उपस्थिति एवं अधोसंरचना की निगरानी करते हैं। शैक्षिक योजनाओं का क्रियान्वयन सुनिश्चित करते हैं। विद्यालय निरीक्षण करते हैं। शैक्षिक परिणामों की समीक्षा करते हैं। मध्यान्ह भोजन योजना का समन्वय करते हैं।

22. जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS)

माध्यमिक विद्यालयों का पर्यवेक्षण करते हैं। मान्यता एवं अनुमोदन प्रदान करते हैं। संस्थागत निरीक्षण करते हैं। पाठ्यक्रम मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। परीक्षा समन्वय करते हैं। शैक्षिक गुणवत्ता की निगरानी करते हैं।

23. जिला उद्यान अधिकारी (DHO)

बागवानी एवं फलोत्पादन को प्रोत्साहित करते हैं। अनुदान योजनाओं का संचालन करते हैं। किसान प्रशिक्षण आयोजित करते हैं। वृक्षारोपण कार्यक्रमों की निगरानी करते हैं। उत्पादन आंकड़े संधारित करते हैं। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देते हैं।

24. यूपीनेडा क्षेत्रीय स्टाफ / नवीकरणीय ऊर्जा इकाई

नवीकरणीय ऊर्जा योजनाओं के क्रियान्वयन में सहयोग करते हैं। लाभार्थी चयन में सहायता करते हैं। स्थापना कार्यों का समन्वय करते हैं। क्षेत्रीय प्रगति अभिलेख रखते हैं। तकनीकी निरीक्षण में सहयोग करते हैं। परियोजना अधिकारी को स्थिति रिपोर्ट भेजते हैं।

25. जिला गन्ना अधिकारी

गन्ना विकास कार्यक्रमों का समन्वय करते हैं। किसान पंजीकरण अभिलेख संधारित करते हैं। चीनी मिलों के साथ आपूर्ति समन्वय सुनिश्चित करते हैं। उत्पादकता की निगरानी करते हैं। किसानों की शिकायतों का निस्तारण करते हैं। भुगतान स्थिति की समीक्षा करते हैं।

26. जिला पूर्ति अधिकारी (DSO)

सार्वजनिक वितरण प्रणाली का पर्यवेक्षण करते हैं। राशन कार्ड निर्गमन की निगरानी करते हैं। उचित मूल्य की दुकानों का निरीक्षण करते हैं। आवश्यक वस्तुओं की कालाबाजारी रोकते हैं। खाद्य सुरक्षा मानकों का अनुपालन सुनिश्चित करते हैं। आपूर्ति अभिलेख संधारित करते हैं।

27. सिंचाई विभाग

मुख्य नहरों एवं सिंचाई संरचनाओं का अनुरक्षण करते हैं। जल वितरण की समता सुनिश्चित करते हैं। मरम्मत एवं अनुरक्षण कार्य कराते हैं। मौसमी जल प्रवाह की निगरानी करते हैं। कृषि विभाग से समन्वय स्थापित करते हैं। अधोसंरचना की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

28. विद्युत विभाग (ग्रामीण)

ग्रामीण विद्युतीकरण सुनिश्चित करते हैं। फीडर प्रदर्शन की निगरानी करते हैं। शिकायत निवारण का पर्यवेक्षण करते हैं। विकास कार्यों हेतु विद्युत आपूर्ति का समन्वय करते हैं। ग्रामीण विद्युतीकरण योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। आपूर्ति व्यवधान का अभिलेख रखते हैं।

29. जिला रेशम अधिकारी

रेशम उत्पादन को प्रोत्साहित करते हैं। सेरीकल्चर योजनाओं का संचालन करते हैं। लाभार्थियों को तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करते हैं। उत्पादन लक्ष्य की निगरानी करते हैं। अनुदान वितरण सुनिश्चित करते हैं। अभिलेख संधारित करते हैं।

30. खादी एवं ग्रामोद्योग अधिकारी

कुटीर एवं ग्रामोद्योग को प्रोत्साहित करते हैं। अनुदान एवं ऋण सुविधा उपलब्ध कराते हैं। उद्यमिता जागरूकता शिविर आयोजित करते हैं। पारंपरिक कारीगरों को सहयोग प्रदान करते हैं। उत्पादन इकाइयों की निगरानी करते हैं। बैंकों से समन्वय स्थापित करते हैं।

31. मंडी परिषद प्रतिनिधि

कृषि मंडियों का पर्यवेक्षण करते हैं। पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया सुनिश्चित करते हैं। मंडी अधोसंरचना का अनुरक्षण करते हैं। किसानों को सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। बाजार आंकड़े संकलित करते हैं। कृषि विभाग से समन्वय करते हैं।

32. जिला उद्योग केंद्र (DIC)

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों को प्रोत्साहित करते हैं। उद्योग पंजीकरण की सुविधा प्रदान करते हैं। उद्यमिता मार्गदर्शन देते हैं। अनुदान योजनाओं का संचालन करते हैं। बैंकों से ऋण समन्वय करते हैं। औद्योगिक आंकड़े संधारित करते हैं।

33. आईटीआई प्रधानाचार्य

व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। कौशल विकास योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। प्रशिक्षण अधोसंरचना का अनुरक्षण करते हैं। उद्योगों से समन्वय स्थापित करते हैं। परीक्षा एवं प्रमाणन आयोजित करते हैं। प्रशिक्षुओं के प्लेसमेंट की निगरानी करते हैं।

34. जिला सेवायोजन अधिकारी

रोजगार पंजीकरण अभिलेख संधारित करते हैं। रोजगार मेलों का आयोजन करते हैं। करियर परामर्श प्रदान करते हैं। कौशल कार्यक्रमों का समन्वय करते हैं। रोजगार आंकड़ों की निगरानी करते हैं। प्लेसमेंट रिपोर्ट तैयार करते हैं।

35. लोक निर्माण विभाग (ग्रामीण)

ग्रामीण सड़कों का निर्माण एवं अनुरक्षण करते हैं। सार्वजनिक भवनों की देखरेख करते हैं। गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित करते हैं। स्थलीय निरीक्षण करते हैं। परियोजना अनुमान तैयार करते हैं। प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

36. जिला प्रोबेशन अधिकारी

महिला एवं बाल संरक्षण योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। बाल गृहों का पर्यवेक्षण करते हैं। पुनर्वास कार्यक्रमों की निगरानी करते हैं। न्यायालय एवं पुलिस विभाग से समन्वय करते हैं। संरक्षण अभिलेख संधारित करते हैं। कल्याण कार्यक्रमों की समीक्षा करते हैं।

37. उप निदेशक, कृषि

कृषि प्रसार गतिविधियों का पर्यवेक्षण करते हैं। किसान संपर्क कार्यक्रम आयोजित करते हैं। नवीन तकनीकों को बढ़ावा देते हैं। ब्लॉक स्तरीय कृषि अधिकारियों की निगरानी करते हैं। फसल परामर्श कार्यों की समीक्षा करते हैं। विस्तार कार्यक्रमों की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

38. अग्रणी जिला प्रबंधक (बैंकिंग)

सरकारी योजनाओं हेतु बैंकिंग सेवाओं का समन्वय करते हैं। वित्तीय समावेशन कार्यक्रमों की निगरानी करते हैं। ऋण वितरण लक्ष्य की समीक्षा करते हैं। जिला स्तरीय बैंकर्स बैठक आयोजित करते हैं। डीबीटी क्रियान्वयन में सहयोग करते हैं। स्वयं सहायता समूहों एवं एमएसएमई को ऋण सुविधा उपलब्ध कराने में सहायता करते हैं।

39. जिला भूमि संरक्षण अधिकारी

मृदा संरक्षण योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। जलागम परियोजनाओं की निगरानी करते हैं। कटाव नियंत्रण उपायों को बढ़ावा देते हैं। स्थलीय निरीक्षण करते हैं। अभिलेख संधारित करते हैं। पर्यावरणीय प्रभाव की रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

40. भूगर्भ जल विभाग

भूजल स्तर की निगरानी करते हैं। जल गुणवत्ता परीक्षण करते हैं। सतत जल उपयोग को बढ़ावा देते हैं। जलविज्ञान संबंधी आंकड़े संधारित करते हैं। सिंचाई योजना निर्माण में सहयोग करते हैं। समय-समय पर रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

41. जल निगम एवं जलकल विभाग

ग्रामीण पेयजल योजनाओं का क्रियान्वयन करते हैं। जल शोधन संयंत्रों का पर्यवेक्षण करते हैं। पाइपलाइन अधोसंरचना का अनुरक्षण करते हैं। जल गुणवत्ता मानकों की निगरानी करते हैं। सेवा वितरण सुनिश्चित करते हैं। योजना प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

42. सहायक निदेशक, बचत

लघु बचत योजनाओं को प्रोत्साहित करते हैं। जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं। डाकघरों के साथ समन्वय करते हैं। लक्ष्य पूर्ति की निगरानी करते हैं। वित्तीय साक्षरता को बढ़ावा देते हैं। प्रदर्शन रिपोर्ट प्रस्तुत करते हैं।

43. वन विभाग

वृक्षारोपण कार्यक्रमों का संचालन करते हैं। वन संपदा का संरक्षण करते हैं। अवैध कटान की रोकथाम करते हैं। पर्यावरण संरक्षण जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करते हैं। पारिस्थितिकी पुनर्स्थापन परियोजनाओं का समन्वय करते हैं। वन क्षेत्र की निगरानी करते हैं।


खंड विकास अधिकारी (BDO) – सहारनपुर (11 विकास खंड)

प्रत्येक विकास खंड में एक खंड विकास अधिकारी नियुक्त होता है, जो मुख्य विकास अधिकारी के प्रशासनिक नियंत्रण में कार्य करता है। BDO मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन, स्वच्छता कार्यक्रम एवं ग्राम स्तरीय अधोसंरचना कार्यों का क्रियान्वयन सुनिश्चित करता है। ग्राम पंचायत सचिवों एवं कार्मिकों की निगरानी करता है। वित्तीय एवं प्रशासनिक अभिलेखों का समुचित संधारण सुनिश्चित करता है। स्थलीय निरीक्षण कर योजनाओं के लाभार्थियों का सत्यापन करता है तथा समय-समय पर प्रगति रिपोर्ट जिला प्रशासन को प्रेषित करता है।

सहारनपुर जनपद के विकास खंड

  • मुजफ्फराबाद (तहसील बेहट)
  • सढ़ौली कदीम (तहसील बेहट)
  • बलियाखेड़ी (तहसील सहारनपुर)
  • पुंवारका (तहसील सहारनपुर)
  • नकुड़ (तहसील नकुड़)
  • गंगोह (तहसील नकुड़)
  • सरसावा (तहसील नकुड़)
  • रामपुर मनिहारन (तहसील रामपुर मनिहारान)
  • नानौता (तहसील रामपुर मनिहारान)
  • देवबंद (तहसील देवबंद)
  • नागल (तहसील देवबंद)