राजस्व न्यायालय (Revenue Court)
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राजस्व न्यायालय मुख्य रूप से भूमि एवं कृषि संपत्ति से संबंधित विवादों का निस्तारण करते हैं, विशेषकर वे मामले जो राजस्व अभिलेख, काश्तकारी अधिकार तथा कृषि जोत से संबंधित होते हैं।
ये न्यायालय निम्न अधिनियमों के अंतर्गत कार्य करते हैं:
- उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006
- उत्तर प्रदेश जमींदारी उन्मूलन एवं भूमि सुधार अधिनियम
- अन्य संबंधित भूमि एवं राजस्व कानून
राजस्व न्यायालय सामान्यतः निम्न स्तरों पर कार्य करते हैं:
- तहसीलदार
- उप जिलाधिकारी (SDM)
- अपर जिलाधिकारी / जिलाधिकारी
राजस्व न्यायालय में सामान्य प्रकार के वाद
1. धारा 24 – अधिकार घोषणा (भूमि स्वामित्व की घोषणा)
धारा 24 के अंतर्गत सामान्यतः निम्न प्रकार के मामले आते हैं:
- भूमिधरी अधिकार की घोषणा
- भूमि स्वामित्व अभिलेखों में संशोधन
- अभिलेखित काश्तकार/स्वामी के संबंध में विवाद
- कृषि भूमि पर स्वामित्व का दावा
यदि किसी व्यक्ति का नाम राजस्व अभिलेखों में गलत अंकित है या अंकित नहीं है,
तो वह धारा 24 के अंतर्गत वाद दायर कर सकता है।
सामान्य प्रक्रिया:
- संबंधित राजस्व अधिकारी (आमतौर पर SDM) के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना।
- विपक्षी पक्ष को नोटिस जारी करना।
- लिखित कथन (Written Statement) प्रस्तुत करना।
- दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत करना (खतौनी, विक्रय विलेख, उत्तराधिकार प्रमाण आदि)।
- सुनवाई एवं आदेश पारित करना।
- आवश्यक होने पर उच्च राजस्व प्राधिकारी के समक्ष अपील।
2. धारा 80 – बेदखली / अवैध कब्जा
धारा 80 के अंतर्गत सामान्यतः निम्न मामले आते हैं:
- कृषि भूमि पर अवैध कब्जा
- बेदखली की कार्यवाही
- कब्जा वापसी
- कृषि जोत पर अतिक्रमण
सामान्य प्रक्रिया:
- राजस्व न्यायालय में आवेदन प्रस्तुत करना।
- कथित अतिक्रमणकर्ता को नोटिस जारी करना।
- राजस्व अभिलेखों का सत्यापन।
- आवश्यक होने पर स्थल निरीक्षण।
- बेदखली अथवा वाद निरस्त करने का आदेश।
- अपील का प्रावधान उपलब्ध।
3. धारा 116 – कृषि भूमि का बंटवारा
धारा 116 के अंतर्गत निम्न प्रकार के मामले आते हैं:
- कृषि जोत का विभाजन
- संयुक्त भूमि का सह-स्वामियों के बीच बंटवारा
- हिस्सों का सीमांकन
सामान्य प्रक्रिया:
- तहसीलदार/SDM के समक्ष बंटवारे हेतु आवेदन।
- सह-स्वामियों को नोटिस जारी करना।
- हिस्सों का निर्धारण।
- बंटवारा नक्शा/योजना तैयार करना।
- आपत्तियाँ (यदि कोई हों)।
- अंतिम आदेश एवं राजस्व अभिलेखों में प्रविष्टि।
नोट: राजस्व न्यायालय मुख्यतः कृषि भूमि एवं राजस्व अभिलेख संबंधी मामलों का निस्तारण करते हैं।
जटिल स्वामित्व विवाद, क्षतिपूर्ति दावे तथा अनुबंध संबंधी मामले सामान्यतः दीवानी न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।