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संस्कृति और विरासत

सहारनपुर जनपद की सांस्कृतिक पहचान विविधता, सह-अस्तित्व एवं परंपराओं के समन्वय की प्रतीक है। यहाँ हिन्दी राजभाषा है, जबकि उर्दू, पंजाबी तथा विभिन्न स्थानीय बोलियाँ भी व्यापक रूप से प्रचलित हैं, जो इस क्षेत्र की साझा सांस्कृतिक विरासत को दर्शाती हैं।

यहाँ का सामाजिक एवं धार्मिक जीवन भारतीय परंपराओं में गहराई से निहित है। होली, जन्माष्टमी, राम नवमी, दीपावली (प्रकाश पर्व), दशहरा आदि प्रमुख हिन्दू पर्व पूरे उत्साह एवं श्रद्धा के साथ मनाए जाते हैं। बसंत पंचमी विशेष रूप से पतंग उड़ाने की पारंपरिक परंपरा से जुड़ी हुई है और इसे हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

अधिकांश हिन्दू पर्व सूर्य एवं चंद्रमा की स्थिति के आधार पर निर्धारित होते हैं तथा हिन्दू व्रत एवं त्योहार पंचांग के अनुसार मनाए जाते हैं। स्थानीय भाषा में उपवास को व्रत तथा उत्सव को त्योहार या पर्व कहा जाता है। अनेक पर्व व्रत, पूजा एवं उपासना के साथ मनाए जाते हैं, जो संयम, श्रद्धा एवं आध्यात्मिक अनुशासन का प्रतीक हैं।


गुघाल मेला

गुघाल मेला सहारनपुर का एक ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण मेला है, जिसका आयोजन प्रतिवर्ष अगस्त–सितंबर माह में भाद्रपद शुक्ल पक्ष दशमी तिथि, अर्थात् जन्माष्टमी के उपरांत, किया जाता है। यह मेला परंपरागत रूप से अंबाला मार्ग पर आयोजित होता है।

गुघाल मेला सांप्रदायिक सौहार्द, आपसी भाईचारे एवं सामाजिक समरसता का प्रतीक माना जाता है। यह मेला सहारनपुर की साझा विरासत का प्रतिनिधित्व करता है तथा सामाजिक एकता और भाईचारे का संदेश देता है।


शाकुम्भरी देवी मेला

शाकुम्भरी देवी मंदिर भारत के प्रमुख शक्ति पीठों में से एक है। यह प्राचीन मंदिर सहारनपुर से लगभग 40 किलोमीटर दूर जस्मौर ग्राम में स्थित है तथा चारों ओर से पहाड़ियों एवं शांत प्राकृतिक वातावरण से घिरा हुआ है।

माँ शाकुम्भरी के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था है। देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त विशेषकर नवरात्रि के अवसर पर यहाँ दर्शन हेतु आते हैं। प्रतिवर्ष हिन्दू पंचांग के चैत्र एवं आश्विन मास (नवरात्रि) में तथा होली के अवसर पर शाकुम्भरी मेले का आयोजन किया जाता है।

परंपरा के अनुसार श्रद्धालु पहले मंदिर से लगभग एक किलोमीटर पूर्व स्थित भूरा देव मंदिर में दर्शन करते हैं, तत्पश्चात माँ शाकुम्भरी के मुख्य मंदिर में दर्शन हेतु जाते हैं। मेलों के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु सहारनपुर से मंदिर तक के मार्गों का विशेष रख-रखाव किया जाता है।

इन मेलों के समय लाखों श्रद्धालु माँ के दर्शन हेतु आते हैं। श्रद्धालुओं द्वारा भंडारों का आयोजन किया जाता है। यहाँ धर्मशालाएँ, एक अतिथि गृह तथा सनातन धर्म पर आधारित गुरुकुल शिक्षा व्यवस्था भी उपलब्ध है।


बाला सुन्दरी मेला, देवबंद

देवबंद में आयोजित बाला सुन्दरी मेला जनपद का एक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजन है, जिसमें प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं पर्यटक सम्मिलित होते हैं।


सांस्कृतिक गतिविधियाँ

सहारनपुर में जनमंच एवं गांधी पार्क में समय-समय पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, लोकनृत्य, संगीत एवं अन्य सांस्कृतिक आयोजन किए जाते हैं, जो स्थानीय कला, परंपराओं एवं सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करते हैं।


खान-पान

सहारनपुर का खान-पान मुख्यतः शाकाहारी है। यहाँ के भोजन में दूध एवं दुग्ध-उत्पादों, ताजी सब्जियों तथा फलों का व्यापक उपयोग किया जाता है, जो क्षेत्र की कृषि-प्रधान जीवनशैली को प्रतिबिंबित करता है।